अठारहवीं शताब्दी के पूर्वाद्ध में युग पुरूष महाराजा सूरजमल द्वारा भरतपुर एवं ऐतिहासिक लोहागढ़ की नींव (वसंत पंचमी 1733-19 फरवरी) रखे जाने की याद ताजा करते हुए भरतपुर स्थापना दिवस समारोह पूर्वक मनाये जाने की चर्चा भरतपुर में अगस्त 2008 में पत्रकारों की बैठक से शुरू हुई। इस बीच भरतपूर के मूल निवासी तथा लोहागढ़ विकास परिषद् के प्रदेश संयोजक डॉ. प्रदीप चतुर्वेदी से भी इस बारे में चर्चा हुई। नवम्बर 2010 में भरतपुर के प्राचीन बिहारी जी मंदिर में अनौपचारिक बैठक में हर साल 19 फरवरी को भरतपुर स्थापना दिवस मनाने का निश्चय किया गया और दिसम्बर 2010 में श्री हिन्दी साहित्य समिति में परिषद् की मेजबानी में पूर्व सांसद प.रामकिशन शर्मा की अध्यक्षता में सम्पन्न बैठक में स्थापना दिवस समारोह के कार्यक्रमो की रूपरेखा निर्धारित की गई तथा 2011 से समारोह का सिलसिला शुरू हुआ।

आरम्भ में मेरे सपनों का भरतपुर विषयक निबंध प्रतियोगिता आयोजित की गई। स्कूल, कॉलेज तथा नागरिक वर्ग की तीन श्रेणी के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। राजस्थान आँपरेटिव डेयरी फैडरेशन लिमिटेड (सरस) द्वारा प्रकाशित कैलेण्डर का तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लोकार्पण किया। समारोह के लिए आवश्यक दिशा निर्देश तथा प्रशासनिक सहयोग देने वाले भरतपुर के तत्कालीन संभागीय आयुक्त राजेश्वर सिंह तथा जिला कलक्टर कृष्ण कुणाल ने कलैण्डर को वितरण के लिए जारी किया। नगर परिषद् तथा अन्य स्वयंसेवी संगठन भी जुड़ते गये। पांच स्थानों से आरम्भ भरतपुर स्वाभिमान दौड में शामिल छात्र-छात्राओं का रैला जब महाराजा सूरजमल की प्रतिमा स्थल पर एकत्रित हुआ तो भरतपुर राजपरिवार के वंशज पूर्व सांसद विश्वेन्द्र सिंह भी उत्साहवद्धर्न के लिए पहुंचे तथा आम जनता के साथ अपने गौरवशाली पूर्वज को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
सूचना केन्द्र में फोटो प्रदशर्नी लगाई गई। भरतपुर के गौरवशाली अतीत पर श्री हिन्दी साहित्य समिति में संगोष्ठी आयोजित की गई। संभागीय आयुक्त, पूर्व राजस्व मंत्री हरी सिंह सहित विभन्न वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए। इतिहासकार रामवीर सिंह वर्मा ने लक्ष्मण मंदिर और व्यापार एकता समिति के अध्यक्ष चन्द्रकांत गर्ग ने गंगा मंदिर को दीपदान से सुसज्जित किया।
बिहारी जी मंदिर में महाआरती तथा फुलवारी में जनमहायज्ञ आयोजित किया गया। पर्यटन विभाग की ओर से आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्र्म प्रस्तुत किया गया !