लोहागढ़ विकास परिषद्


पश्चिमी राजस्थान में तब अकाल एवम सूखे की विभिषिका से मानवजीवन और पशुधन जूझ रहा था। तब पूर्वी राजस्थान के प्रवेश द्वार भरतपुर अंचल के कुछ समाजसेवियों तथा संस्थाओ ने पीडित पशुधन को राहत पहुचाने की पहल की। तत्परता से 21 ट्रक पशुचारा एकत्रित किया गया। पिंकसिटी प्रेस क्लब जयपुर के सामने 18 मई 2000 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने चारा ट्रको को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। गहलोत ने पहली बार किसी मुख्यमंत्री के रूप में इस सहायता के लिए भरतपुर क्षेत्र की जनता के प्रति भावनात्मक आभार जताया।
मुख्यमंत्री ने भरतपुरवासियों के इस अनुठे सहयोग तथा चारा प्रबन्धन को मिसाल बताया और दानदाताओं से इसके अनुसरण की अपील की। भरतपुर वासियों के लिए यह दृष्टिकोण उत्साहजनक था।
भरतपुर सम्भाग के बारे में अब तक प्राय: यही चर्चा रही हें कि इस सम्भाग के प्रति प्रदेश के राजनीतिक तथा प्रशासनिक तंत्र का रुख प्राय: उपेक्षित ही रहा हें। साथ ही प्रदेशवासी इस सम्भाग कि बोलचाल कि आम भाषा के प्रति भी कठोर आलोचक रहे हें। राजनीतिक व सामाजिक संदर्भो में इस सम्भाग कि चर्चा या तो होती ही नहीं हें और अगर होती हें तो वह सकारात्मक नहीं कही जा सकती।
यह एक बड़ी लकीर थी और भरतपुरवासियों में दृढ आत्मविश्वास तथा आत्मसम्मान कि भावना जगाने का संकल्प लेकर उत्साही साथियों कि टोली जुट गई। गोपाल गुप्ता, डा.लोकेश चन्द्र शर्मा, विनोद गेरा, किशोर शर्मा, राजेन्द्र राज इत्यादि कर्मठ साथीयों ने कंधे से कंधे मिलाकर इस कारवा को व्यापक बनाने का वीडा उठाया।
रचनात्मक द्रष्टिकोण से उठाये गए इस कदम को जयपुर में निवास कर रहे भरतपुर जिले के मूल निवासियों ने वैचारिक आधार देने का निश्चय किया। जागरुक साथियों की इस टोली के आगीवाण बने प्रदीप चतुर्वेदी जिन्होने कालान्तर में लोहागढ़ विकास परिषद का गठन किया। आपसी विचार-विमर्श और कुछ कर गुजरने की दिली तमन्ना से सिलसिला आगे बढा। इसी दौरान भरतपुर के मूल निवासी राज्य के वरिष्ठ पत्रकार गुलाब बत्रा ने भरतपुर के पत्रकार साथियों तथा जागरुक नागरिकों के साथ अगस्त २०१० में भरतपुर में बैठक कर क्षेत्रीय विकास के बारे में चर्चा की।
भरतपुर अंचल की ताकत और कमजोरियों पर रोशनी डाली गई और इस वैचारिक प्रक्रिया को असली जमा पहनाने के साथ क्षेत्र की जनता को जागरुक करने की जरूरत महसूस की गई। इसी विचार मंथन में भरतपुर स्थापना दिवस के आयोजन का निश्चय किया गया और २०११ से इस की शुरूआत भी हो गई।
लोहगढ़ विकास परिषद ने जयपुर से इसकी पहल कर भरतपुर स्थापना दिवास समारोह को मूर्त रूप दिया और यह क्रम अनवरत जारी हें। लोह़ागढ़ विकास परिषद का रजिस्ट्रेशन करवाया जा चुका हें। इसकी गतिविधियों को विस्तार देते हुए जनचेतना के इस अभियान को अब क्षेत्रीय विकास से जोडने का निश्चय किया गया। राजस्थान और भरतपुर संभाग से जुड़े मुददों पर चर्चा की शुरुआत भरतपुर जिले से की गई। पहली कड़ी में जयपुर में १० अप्रेल २०१३ को आयोजित बैठक में भरतपुर जिले के पूर्व तथा वर्तमान सांसद एवम् विधायक जज सहित जयपुर में निवास कर रहे जिले के प्रभावशील नागरिको राजपत्रित पदों पर रहे अधिकारियों को आमंत्रित किया गया। बैठक में चर्चा के मद सिंचाई एवम् जल संसाधन तथा सड़क विकास के बारे में दो अध्ययन दल बनाये गये। इसी श्रंखला में कोटा बैराज़ से बरसात के मौसम में निकाले जाने वाले अतिरिक्त पानी को गंभीरी नदी के मध्यम से भरतपुर जिले को उपलब्ध कराने सहित अन्य जनसमस्याओं सम्बंधी ज्ञापन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को प्रस्तुत किया गया। मुख्यमंत्री को २६ दिसंबर २०१३ को पत्र लिखकर उनके पहले कार्यकाल में भरतपुर संभाग के गठन के प्रति ध्यान दिलाते हुए संभाग मुख्यालय के लिए सभी आवश्यकक सुविधाये केबिनेट वैठक के साथ ही स्वतंत्रता दिवस एवम गणतंत्र दिवस के आयोजन की माँग की गई। गत 4 फरवरी से 18 फरवरी 2014 तक भरतपुर सम्भाग के दौरे पर आए मंत्रिमंडल सदस्यों तथा मुख्य सचिव राजीव महर्षि सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने दूर दराज़ गांवो कस्बों तक जाकर जनसमस्याओं का जायजा लिया तथा मंत्रिमंडल की वैठक में व्यापक जनहित के अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
इसके फलोअप में 27 अप्रेल 2014 को जयपुर में सम्पन्न वैठक में दो कार्यदल गठित किए गए।